जहां सत्य होता है वहीं विजय होता है । असत्य का अन्ततोगत्वा नाश होता है । सत्य से ही जीवन के परमतत्त्व तक पहुँचा जा सकता है । सत्य का बोध ज्ञान द्वारा होता है । अतः सत्य एवं ज्ञान दो तत्त्व अत्यन्त आवश्यक तत्त्व है । इनका परिचय कराना एवं उससे जीवन को होने वाले लाभ का परिचय करना इस फाउण्डेशन का मुख्य उद्देश है ।
सम्यग् दर्शन जीवन के सत्य को समझने का मार्ग है । सम्यक् अर्थात् सत्य एवं दर्शन अर्थात् बोधि, बोध । सत्य बोध से ही परम सत्य तक पहुँचा जा सकता है । सम्यक् दर्शन परम सत्य को पाने का प्रथम कदम है । इसको बोधि, समकित, सम्यक् दृष्टि आदि कहा है । तत्त्वरुचि भी सम्यग् दर्शन है । महावीर का मार्ग है और उससे जीवन में क्रांति आती है ।
सम्यग् दर्शन की शिविर तीन दिन की होती है । जिसमें सम्यग् दर्शन एवं कायोत्सर्ग की साधना का परिचय कराया जाता है । प्रायः करके प्रति माह भारत के विभिन्न शहरो में आयोजित होती है । अभी तक कुल 25 शिविरों का आयोजन हो चूका है ।
शिविर में प्रवेश पाना अत्यंत सरल है । शिविर जिस शहर में आयोजित होती है उसकी सूचना अलग-अलग माध्यम से दी जाती है । सूचना प्राप्त होने के पश्चात् रजीस्ट्रेशन फोर्म भरना होता है । प्रवेश प्राप्ति की सूचना आपको फोन, इमेइल, वोट्सअप आदि द्वारा दी जाती है । आयु का कोई बंधन नहीं रखा गया है । केवल जिज्ञासा ही प्रवेश प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानी गई है ।
शिविर में मिथ्यादर्शन का स्वरूप, सम्यग् दर्शन की व्याख्या, सम्यग् दर्शन की प्राप्ति का क्रम, सम्यक्त्व के विभिन्न प्रकार का विवेचन तथा कायोत्सर्ग का अभ्यास कराया जाता है ।